Thu. Sep 19th, 2019

_उम्मीद अभी बाकी है मेरे दोस्त मिशन चंद्रयान

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Report : Manish Tripathi 

इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन)

दुनिया की एकमात्र ऐसी स्पेस एजेंसी जिसने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया जिसने अपने सालों के सफर को साइकल से चांद तक पहुंचा दिया उसमें हार और असफलता का नामों निशान नहीं.!

         ISRO

एक बार में मंगल पर पहुंचना दुनिया को वहां मौजूद पानी के स्रोत को बताना,एक साथ 104 उपग्रहों को उड़ाकर अंतरिक्ष में भारत के तिरंगे को लहरा देने वाला ISRO कभी फेल हो ही नहीं सकता साहब।

अंतरिक्ष की दुनिया में नया इतिहास रच चूका इसरो की उपलब्धियां ऐसी ही नहीं जिसका लोहा पूरा विश्व मान चुका है और इसरो एक ऐसा नाम जिसमें असफलता ना के बराबर है और यही कारण है कि आज दुनिया के 30 से ज्यादा देश इसरो के राकेट से अपनी उपग्रहों को लांच करते हैं।

लेकिन इसरो का यह सफर इतना आसान नहीं इस सफर की शुरुआत 15 अगस्त 1969 को हुई. इसरो की स्थापना गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे विक्रम साराभाई के द्वारा हुआ विक्रम साराभाई एक ऐसा नाम जिसपे हर भारतीय आज गर्व करता है साराभाई का जीवन हमेशा युवाओं को प्रेरित करना नए नियमों और विज्ञान में बड़ी दिलचस्पी थी और इसी को लेकर उन्होंने 1947 में अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना की जो समय के साथ बदलते आगे बढ़ते तमाम कठिनाइयों को झेलते विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करता रहा और विक्रम साराभाई की राखी ये नींव सन 1969 में इसरो ISRO के रूप में आज स्थापित है।

भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (अहमदाबाद)

इसरो की स्थापना से अब तक का सफर बहुत ही कठिन और परिश्रम पूर्ण रहा है लेकिन हर बार कुछ नया और असाधारण को साधारणतया में बदलना और असंभव को संभव बनाते हुए इसरो दुनिया में ऐसा नाम स्थापित किया जिसको संभव और सफलता का दूसरा नाम कहा जाता है.!

भारत में इसरो के जरिए सबसे पहले 19 अप्रैल 1975 को अपना उपग्रह आर्यभट्ट सेटेलाइट लांच किया था जिसकी लैंडिंग सोवियत यूनियन ने की थी उस समय भारत के पास अपने संसाधन और टेक्नोलॉजी नहीं हुआ करते थे लेकिन फिर भी इसरो ने सोवियत यूनियन के जरिए इस कार्य को करके पूरी दुनिया का ध्यान भारत की तरफ आकर्षित किया था.

           उपग्रह आर्यभट्ट सेटेलाइट

 इसके बाद कई उपग्रहों को भारत ने लांच किया और सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ता हुआ आगे इसरो बढ़ता रहा।

तारीख 22 अक्टूबर 2008 भारत के लिए एक ऐसा दिन जिसने दुनिया में भारत की अंतरिक्ष ताकत और इसरो का लोहा मनवा दिया भारत ने पूरी दुनिया में पहली बार पीएसएलवी (PSLV) रॉकेट से देश के पहले मून मिशन चंद्रयान वन को लांच किया chandrayaan-1 ने 312 दिनों तक चांद से डाटा और तस्वीरें लेकर इसरो को भेजा इसके बाद जो हुआ वह पूरी दुनिया में भारत और इसरो को अंतरिक्ष का बादशाह बना दिया इसरो ने दुनिया में सबसे पहले चांद पर जीवन और वहां पर पानी होने के प्रमाण दिए इसके बाद दुनिया की कई बड़े देशों और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने भी इसकी पुष्टि की और इसी के साथ इसरो लगातार सफलताओं की सीढ़ियों पर चढ़ता रहा जिसमें नवंबर 2013 को पहला मार्स आर्बिटर मिशन मंगलयान लांच किया गया जिसकी पहली ही प्रयास में मंगल पर पहुंचने की सफलता हासिल की, 15 फरवरी 2017 इसरो का वर्ल्ड रिकॉर्ड जिसने पीएसएलवी PSLV_C37 से 104 उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में लांच किया और सफल रहा.

                                                                           मार्स आर्बिटर मिशन मंगलयान

इतनी ज्यादा संख्या में एक साथ सेटेलाइट लांच करने वाला भारत  पूरी दुनिया में इकलौता देश है और इसरो इकलौती स्पेस एजेंसी है.!

दोस्त इन सभी घटनाओं को देखकर यह कहना गलत नहीं कि सफलता और इसरो एक सिक्के के दो पहलू हैं

साहब आज जब दुनिया हमारे तरफ नजरें गड़ाए देख रही है ऐसे समय में जब इसरो ने जिस मिशन को अंजाम दिया है जिसके बारे में दुनिया की बड़ी अंतरिक्ष एजेंसीया सिर्फ सोच रही हैं तब इसरो ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के करीब पहुंचकर दुनिया को चौंका दिया है

तारीख 22 जुलाई 2019 को इसरो द्वारा जब श्रीहरिकोटा से chandrayaan-2 को लांच किया गया तो पूरी दुनिया की निगाहें हम पर टिक गई 3872 किलोग्राम के इस chandrayaan-2 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने का प्रयास किया गया इससे पहले दुनिया के किसी देश में  चंद्रमा के इस ध्रुव पर अपनी स्पेस नहीं उतारे हैं। पृथ्वी से चांद की लगभग 384400 किलोमीटर की दूरी को 48 दिनों के सफर में पार कर जब 7 सितंबर की सुबह 2:00 बजे के करीब chandrayaan-2 पहुंचने वाला था तभी किसी कारणवश चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की मामूली सी दूरी रह जाने के बाद अचानक रोवर से संपर्क टूट गया और वहां से जानकारियां आने बंद हुई…!
chandrayaan-2

इसरो कि कंट्रोल रूम में मौजूद सभी वैज्ञानिक इंजीनियर और खुद देश की प्रधानमंत्री कि चेहरे निराश हो गए किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या.इसी बीच इसरो चीफ ने जानकारी दी कि हमारा रोवर से संपर्क टूट चुका है चारों तरफ सन्नाटा और देश में मानव एक निराशा छा गया तभी वहां मौजूद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने इसरो चीफ से मुलाकात की उन्हें ढांढस बंधाया पीठ थपथपाई और इस असंभव से कार्य को संभव करने के लिए सराहा वहां मौजूद सभी वैज्ञानिक और इंजीनियर को भी उनके इस कार्य को सराहा उन्हें शुभकामनाए दी बात खतम हुई देश में एक निराशा सी छा गई लगा की सब कुछ ख़तम.!

 लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई दोस्त हम असफल नहीं हुए सफलता का दूसरा नाम कहा जाने वाला इसरो असफल कैसे हो सकता है इसने तो देश के तिरंगे को वहां पहुंचा दिया जहां दुनिया की कई सारे सुपर पावर भी नहीं पहुंच सके…!

 मौजूदा इसरो चीफ के सीवन (K.Sivan) का कहना है हम दोबारा लेंडर ‘ विक्रम ‘ से संपर्क  के प्रयास में हैं और जल्द ही हम सफल होंगे.

chandrayaan-2 के जरिए चांद को छूने का प्रयास बीती रात असफल तो रहा लेकिन इसरो के हौसलों की उड़ान ने तो वह कर दिया जो किसी ने सोचा भी नहीं था अपने मिशन के 95% उद्देश्यों को पाने में सफल हुआ इसरो आज दुनिया में भारत और करोड़ों भारतीयों काम नाम गर्व से ऊंचा कर दिया..!

अब बात उसकी जो सफल और सुरक्षित है आपको बता दें कि chandrayaan-2 का आर्बिटर अब भी चंद्रमा की कक्षा में मौजूद है इसरो के वैज्ञानिकों की माने तो आर्बिटर अभी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है 1 साल की अवधि वाला यह आर्बिटर चंद्रमा की कई सारी तस्वीरें लिखकर भेज सकता है इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया है कि आर्बिटर  लेंडर की भी तस्वीरें लेने में सक्षम है और भेज सकता है हम प्रयास में हैं और जल्द ही स्थिति के बारे में पता चल सकता है और हम सफल होंगे।

इसरो की महान सफलता पर गर्व है हर भारतीय को हम सलाम करते हैं इसरो के इस महान कार्य को जय हिंद भारत माता की जय..!

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