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खाताधारकों को निर्माण करने से प्रशासन ने लगाई रोक

संवाददाता: दिवाकर सिंह हसनगंज/उन्नाव: योगी सरकार में अपनी ही जमीन पर निर्माण करने के लिए तहसील प्रशासन के द्वारा रोका गया खाताधारको को मामला मुख्यालय हसनगंज के बस स्टॉप का है जहां पर मंगलवार के दिन खाताधारक अपने गाटा संख्या 358/1 का निर्माण कर रहा था तभी अचानक मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा मौके […]

संवाददाता: दिवाकर सिंह

हसनगंज/उन्नाव: योगी सरकार में अपनी ही जमीन पर निर्माण करने के लिए तहसील प्रशासन के द्वारा रोका गया खाताधारको को मामला मुख्यालय हसनगंज के बस स्टॉप का है जहां पर मंगलवार के दिन खाताधारक अपने गाटा संख्या 358/1 का निर्माण कर रहा था तभी अचानक मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा मौके पर पहुंचकर विवाद चालू कर दिया गया । मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि जो निर्माण हो रहा है वह गलत है, यहां पर कब्रिस्तान है और वह लोग इस निर्माण को नहीं करने देंगे। इसी के साथ-साथ प्रशासन व खाताधारको के खिलाफ नारेबाजी करने लगे मामले की सूचना मिलते ही मौके पर उपजिलाधिकारी प्रदीप वर्मा व कोतवाल अरुण प्रताप सिंह पहुंचे । लेकिन मामला मौके पर निपट ना सका । जिसके बाद दोनों पक्षों को कोतवाली बुला करके मामला 15 दिन के अन्दर निपटने के अस्वासन पर शान्त कराया।

बताते चलें 358 गाटा संख्या जिसका रकबा 3 बिस्वा है जो कि बंजर जमीन है। जिसमें डेढ़ बिसुआ जमीन 1992 में प्रमोद सिंह आदि को विनिमय के तहत दी गई थी जो कि तहसील मुख्यालय को लखनऊ-बांगरमऊ मार्ग से जुड़ने के लिए रास्ता दिया गया था। बाकि डेढ़ बिसुआ आज भी खसरा व अन्य कागजों में बंजर दर्द है जिस पर मौजूदा हालत में मस्जिद का निर्माण किया गया है घंटों मशक्कत करने के बाद भी प्रशासन के द्वारा कोई हल नहीं निकाला जा सका । और 15 दिन का समय मुस्लिम पक्ष के लोगों को विवाद को निपटाने के लिए दे दिया गया । अब सवाल यह उठता है कि जब खाताधारक के नाम जमीन दर्ज है तो उसको तहसील प्रशासन के द्वारा किस अधिकार से निर्माण करने के लिए रोका जा रहा है। क्या मुस्लिम पक्ष के लोगों को अविवादित जमीन को विवादित बनाने का मौका दिया जा रहा है जबकि अगर प्रशासन चाहता है तो मामला उसी समय निपट सकता था कहीं ना कहीं तो शासन का सुस्त रवैया मामले को विकराल रूप देने के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

।इस संबंध में में एसडीएम प्रदीप वर्मा ने बताया कि तीन बिसुवा जमीन में डेढ़ बिसुवा जमीन पर मस्जिद है और डेढ़ बिसुवा जमीन विनिमय के तहत 1992 में प्रमोद सिंह आदि के नाम की जा चुकी है। प्रदीप वर्मा ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों का आरोप गलत है तहसील आने के लिए प्रमोद सिंह आदि के भूमिधरी खाते से जमीन ली गई थी। उसी के बदले नियमानुसार प्रमोद सिंह आदि को दी गई थी।मामले को शांत करा दिया गया है। उधर कोतवाली प्रभारी एपी सिंह ने बताया कि जो भी लोग नारेबाजी कर मौहाल बिगाड़ रहे थे उन्हें चिन्हित कर विधिक कार्यवाही की जाएगी।

24 घण्टे बीतने के बाद भी पुलिस के द्वारा अभी तक उन नारेबाजी और अनैतिक शब्दो का प्रयोग करने वालो के खिलाफ कोई कार्यवाही नही करी गई।

अब प्रशासन क्या करेगा जब मस्जिद बंजर जमीन पर बनी है जब कि योगी सरकार का आदेश है कि अवैध निर्माण नही होंगे।