बाबा के भक्तों को ये भी जानना जरूरी है कि, क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि

बाबा के भक्तों को ये भी जानना जरूरी है कि, क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि
बाबा के भक्तों को ये भी जानना जरूरी है कि, क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि

भगवान भोलेनाथ की असीम अनुकंपा पाने का महापर्व महाशिवरात्रि का सभी भक्तों को पूरे साल इंतजार रहता है। महाशिवरात्रि फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। जबकि पूरे साल में कुल 12 शिवरात्रि आती है। लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि का इनमें सबसे अधिक महत्व है इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहते हैं।

शिव पूजन का पुण्य होता है प्राप्त
शिव महापुराण में कहा गया है कि जो भक्त महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के लिंग स्वरूप की पूजा करता है उसे पूरे साल शिव पूजन का पुण्य प्राप्त हो जाता है। सवाल उठता है कि आखिर महाशिवरात्रि का इतना महत्व क्यों बताया गया है, इसका जवाब भगवान शिव ने ही शिव महापुराण में दिया है।

ब्रह्माजी और विष्णुजी को जानना था यह रहस्य
सृष्टि के आरंभ में ब्रह्माजी और विष्णुजी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। इनके विवाद को देखकर एक अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ और आकाशवाणी हुई, जो इस अग्नि स्तंभ के आदि और अंत को जान लेगा वही श्रेष्ठ होगा। ब्रह्माजी और विष्णुजी दोनों युगों तक प्रयास करने के बाद भी इस रहस्य को नहीं जान पाए तब भगवान विष्णु ने अपनी पराजय स्वीकर कर ली और अग्नि स्तंभ से अपना रहस्य प्रकट करने की विनती की।

दिव्य ज्योर्तिलिंग में बदल गई अग्नि शिखा
भगवान शिव ने बताया कि दरअसल आप दोनों श्रेष्ठ हैं लेकिन आप सभी से श्रेष्ठ मैं परबह्म हूं जो आदि और अंत से रहित होकर अभी अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हुआ हूं। भगवान विष्णु और ब्रह्माजी ने तब उस अग्नि स्तंभ की पूजा की। इसके बाद वह अग्नि स्तंभ एक दिव्य ज्योर्तिलिंग में बदल गई। जिस दिन यह घटना हुई थी वह महाशिवरात्रि थी। भगवान विष्णु और ब्रह्मा से पूजित होने के बाद भगवान शिव ने यह वरदान दिया कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्त उनके लिंग स्वरूप की पूजा करेगा उसे पूरे साल शिव की उपासना का फल प्राप्त हो जाएगा।

बाबा के भक्तों को ये भी जानना जरूरी है कि, क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि

भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह
महाशिवरात्रि का महत्व केवल इसलिए ही नहीं है। यह शिव और शक्ति के मिलन का भी दिन है। इसी दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। विवाह रात्रि के समय हुआ था इसलिए इस व्रत में रात का खास महत्व है। महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन पर्व के रूप में भी जाना जाता है इसलिए इस दिन भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की पूजा करना भी आवश्यक होता है। इस दिन शिव पार्वती की पूजा करने से सुहागन स्त्रियों को सौभाग्य प्राप्त होता है जबकि कन्याओं को मनोनुकूल जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

इस मंत्र का करें जप
महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में निशीथ काल में भगवान शिव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र के जप का शिव पुराण में बड़ा महत्व बताया गया है। पुराण के अनुसार इस रात जो व्यक्ति मध्यरात्रि में शिव और शिवा की दूध, दही, घी, शहद, गन्ने के रस, गंगाजल से अभिषेक करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो व्यक्ति अटूट चावल शिवजी को अर्पित करता है वह धन पाता है। यही फल गन्ने से अभिषेक का भी बताया गया। इस वर्ष 21 तारीख की मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 9 मिनट से 1 बजे तक निशीथ काल है। यह समय शिव साधना के लिए अति उत्तम है।

इस तरह करें पूजन
इस रात में जो व्यक्ति शिव कृपा का फल चाहता हो उसे कम से कम 1 लाख बार महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। शिवपुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति 5 लाख बार महामृत्युंजय मंत्र का जप कर लेता है वह शिव दर्शन के पुण्य का लाभ पाता है। वैवाहिक जीवन में प्रेम और अटूट संबंध के लिए कच्चा धागा लेकर शिवलिंग और देवी पार्वती की प्रतिमा पर 7 लपेटा लगाना चाहिए। इस रात में शिव पुराण का पाठ करना भी बड़ा ही उत्तम माना गया है।


Ryan Reynold
Piyush Gupta is a writer based in India. When he's not writing about apps, marketing, or tech, you can probably catch him eating ice cream.

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