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बाराबंकी : धड़ल्ले से चल लकड़ियों की तस्करी का व्यापार, अलग पहचान बना चुका जैदपुर कस्बा

जैदपुर बाराबंकी। जैदपुर कस्बा प्रतिबन्धित लकड़ी के मामले में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। आम से लेकर शीसम यहाँ तक कि सागौन की लकड़ी सहित सभी प्रतिबन्धित लकड़ियों को कटान माफियाओं द्वारा कटवा कर बड़े ही शातिराना अंदाज में आरामशीनों पर डालते है। जहाँ से रातों रात प्रतिबन्धित लकड़ी कटकर सुरक्षित स्थान पर […]

जैदपुर बाराबंकी। जैदपुर कस्बा प्रतिबन्धित लकड़ी के मामले में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। आम से लेकर शीसम यहाँ तक कि सागौन की लकड़ी सहित सभी प्रतिबन्धित लकड़ियों को कटान माफियाओं द्वारा कटवा कर बड़े ही शातिराना अंदाज में आरामशीनों पर डालते है। जहाँ से रातों रात प्रतिबन्धित लकड़ी कटकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दी जाती है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस की निगरानी में होती है प्रतिबन्धित लकड़ियों की निकासी। जिसके लिए कस्बे में तैनात सिपाही हर एक लकड़ी से लदी गाड़ियों से सुविधा शुल्क वसूल करते है।


आरामशीनों के इर्दगिर्द दिखते है हर समय सिपाही।

पैसा कमाने के चक्कर में कस्बे में तैनात सिपाही हर समय आरामशीनों पर अपनी निगाहें गड़ाए रहते है। कौन सी लकड़ी से लदी गाड़ी किस आरामशीन पर लकड़ी गिरा रही है इसकी खोज में सिपाही हर समय लगे रहते है।

एक सप्ताह पूर्व सभी आरामशीनों पर की गई थी छापामारी।

एसडीएम सदर अभय पाण्डेय रेंजर संजय श्रीवास्त व द्वारा एक सप्ताह पूर्व कस्बा जैदपुर की सभी आरामशीनों पर छापामारी की गई थी। छापामारी के दौरान कई आरामशीनों पर अवैध प्रतिबन्धित लकड़ी भारी मात्रा में पाई गई थी। जिसपर अधिकारियों ने आरामशीनों के संचालकों पर कार्वाही के आदेश दिये थे। परन्तु एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरामशीन संचालकों पर कोई कार्यवाही नही की गयी है। और आज भी कई आरामशीनों पर प्रतिबन्धित लकड़ियों के बोटे बखूबी देखे जा सकते है। अधिकारियों द्वारा ठोस कार्रवाई न किये जाने से आरामशीन के संचालक बेखौफ होकर प्रतिबन्धित लकड़ियों का धन्धा कर रहे है।