बहन-भाई के प्यार का प्रतीक है भाई दूज, जानें शुभ मुहूर्त

The Republic India : बहन-भाई के प्यार का प्रतीक है भाई दूज, जानें शुभ मुहूर्त

 पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली  जश्न के सबसे आखिरी यानी पांचवें दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है.भाई दूज का त्योहार बहन और भाई के प्यार का प्रतीक होता है. ये त्योहार रक्षाबंधन की तरह ही होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि इस दिन राखी नहीं बांधी जाती, बल्कि बहनें सिर्फ अपने भाइयों का तिलक करती हैं और आरती उतारती हैं.

 

जानिए क्यों मनाते हैं भैया दूज 

भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।

भाई दूज शुभ मुहूर्त

मुहूर्त प्रारंभ- दोपहर 1 बजकर 10 मिमट.

मुहूर्त समाप्त- दोपहर 3 बजकर 27 मिनट.

मुहूर्त अवधि- 2 घंटे 17 मिनट.

ऐसे करें पूजा 

– सबसे पहले बहनें चावल के आटे से चौक तैयार करें.

– इस चौक पर भाई को बैठाएं फिर उनके हाथों की पूजा करें.

– इसके लिए भाई की हथेली पर आप चावल का घोल लगाएं.

– इसके बाद इसमें सिन्दूर लगाकर कद्दु के फूल, पान, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ते हुए मंत्र बोलें.

– किसी-किसी जगह पर इस दिन बहनें अपने भाइयों की आरती भी उतारती हैं और फिर हथेली में कलावा बांधती हैं.

– भाई का मुंह मीठा करने के लिए भाइयों को मिश्री खिलाना चाहिए.

– शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर दीए का मुख दक्षिण दिशा की ओर करके रखें.


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alok singh jadaun

Journalist

2 thoughts on “बहन-भाई के प्यार का प्रतीक है भाई दूज, जानें शुभ मुहूर्त

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