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कोरोना की काट के लिए रात में जगा रहा कोर्ट

 यूं तो यह खबर 48 घंटे पहले की है, लेकिन यह देश के लिए नजीर है कि कैसे लोकतंत्र का चारों स्तंभ कोरोना से जंग के लिए तटस्थ और क्रियाशील है। विधायिका के बनाए नियमन को जहां कार्यपालिका बहुत सख्ती से लागू करा रही है, वहीं न्यायपालिका रात में जाग कर कोरोना के खिलाफ लड़ी […]

 यूं तो यह खबर 48 घंटे पहले की है, लेकिन यह देश के लिए नजीर है कि कैसे लोकतंत्र का चारों स्तंभ कोरोना से जंग के लिए तटस्थ और क्रियाशील है। विधायिका के बनाए नियमन को जहां कार्यपालिका बहुत सख्ती से लागू करा रही है, वहीं न्यायपालिका रात में जाग कर कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही जंग को नैतिक संबल प्रदान करने के लिए अपने दायित्व का निर्वहन कर रही है। और अब इन सबके साथ रोज-रोज का जोखिम उठाकर पत्रकारिता सदा से कदम ताल कर रही है। संदर्भ मुरादाबाद की उस घटना का है, जिसमें बुधवार को यहां के नवाबपुरा मोहल्ले में लोगों ने क्वारंटाइन कराने गए डॉक्टरों और पुलिस की टीम पर हमला कर उन्हें जख्मी कर दिया था।

गुरुवार की सुबह उन्हें जेल भेजा गया। प्रक्रिया पूरी करने के लिए रात तीन बजे कोर्ट में पेशी हुई और पांच बजे 17 आरोपित जेल भेजे गए।

बुधवार को हॉटस्पॉट बने नवाबपुरा में स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना आशंकितों को क्वारंटाइन के लिए ले जाने पहुंची थी। वहां अराजक हुई भीड़ ने टीम पर हमला कर दिया। इसके बाद पहुंचे पुलिस फोर्स पर भी पथराव किया गया। पुलिस ने 17 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। अब दिक्कत थी आरोपितों को कहां रखा जाए?

जिलाधिकारी ने रात में ही लिखा पत्र

आरोपित हॉटस्पॉट से पकड़े गए थे और उनमें कोरोना वायरस के पीडि़त होने की आशंका थी। महिलाओं की गिरफ्तारी होने के कारण कानून व्यवस्था खराब होने का भी अंदेशा था। ऐसे में उन्हें रातभर थाने में रोका जाना संभव नहीं था। ऐसे में पुलिस कर्मियों ने देर रात एफआइआर दर्ज की और फिर न्यायालय में पेश किए जाने संबंधी सभी कागजी कार्रवाई तत्काल पूरी की। उधर, एसएसपी अमित पाठक ने जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह से मिलकर रात में ही सभी आरोपितों की पेशी कराए जाने का निर्णय लिया। जिलाधिकारी ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखा और परवाना भेजा गया। इसमें कानून व्यवस्था बिगडऩे आशंका को देखते हुए रात में ही रिमांड पर सुनवाई करने की गुजारिश की गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने तत्काल रिमांड पर सुनवाई के लिए रेलवे मजिस्ट्रेट रघुवंश मणि सिंह को नामित किया और उन्हें सूचना भिजवाई। इसके बाद उन्होंने आवास पर ही सुनवाई करने का फैसला लिया। आरोपितों में महिलाएं भी शामिल थीं, इसलिए तत्काल महिला थाना प्रभारी को भी बुलाया गया। इन सभी की पेशी रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने हुई और उन्होंने मात्र दस मिनट में ही आरोपितों को जेल भेजने का फैसला सुना दिया। साथ ही उनके के लिए अलग बैरक का इंतजाम करने के भी निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रक्रिया पूरी कर सभी आरोपितों को पांच बजे जेल में दाखिल करा दिया गया। इस समय वे जेल में क्वारंटाइन कराए गए हैं और जिस मेडिकल टीम पर उन लोगों ने हमला किया था, उन्हीं के सहयोगी उनकी हालत पर नजर रखकर उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं।