गोरखपुर में पांच वर्ष पहले पाकिस्तान के नम्बर से फोन आता था, मैं काट देता था- योगी

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नाथ संप्रदाय की महत्ता पर प्रकाश डाला। हिंदी भवन के यशपाल सभागार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने युग प्रवर्तक महायोगी गोरखनाथ पर केंद्रित तीन दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन अपने विचार रखे।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु गोरखनाथ पर आधारित राष्ट्रीय गोष्ठी में सभी का स्वागत है। बहुत गूढ़ विषय पर मंथन के लिए आप सब यहां जमा हुए हैं। मेरे लिए यह विषय ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मैं पिछले 25 वर्ष से इस परंपरा से जुड़ा हूं। जब हम ऐसे महापुरुष के बारे में सोचते हैं। ऐसे में एक ओर सम्प्रदाय और आस्था का विषय होता है। दूसरा इतिहास और साहित्य का होता है।

दोनों का समन्वय कभी होता है तो कभी नहीं हो पाता है। इस विषय में देश को जानने के लिए मजबूर होना पड़ता है।सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु गोरखनाथ ही नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे।

वह शिव स्वरूप माने गए हैं। गुरु गोरखनाथ की मान्यता भारत के साथ पाकिस्तान, भूटान, नेपाल तथा म्यांमार में है। वह वहां की कई लोकगाथाओं में विद्यमान हैं। उनकी उपस्थिति इतिहास और साहित्य की दृष्टि में अलग-अलग कालखंड में है। गोरखपुर में पांच वर्ष पहले पाकिस्तान के नम्बर से फोन आता था।

मैं फोन काट देता था। इसके बाद फिर सिंगापुर से एक सिख परिवार आया था। तब उन्होंने बताया कि पाकिस्तान गया था। जब मैं वहां गया तब पेशावर के पास पहाड़ी पर यात्रा चल रही थी। तब अचरज हुआ। तब मैं कॉल कर रहा था। गोरखनाथ से जुड़ाव पाकिस्तान में भी हैं। काठमांडू में आज भी मत्स्येन्द्रनाथ की पूजा होती है।

मृगस्थली नेपाल में गोरक्षनाथ जी का मंदिर है। वहां पर रोज पूजा होती है।  गोरक्षनाथ जी ने देवीपाटन पाटेश्वरी मंदिर की स्थापना की थी।  भारत मे कोई प्रांत ऐसा नहीं, जहां गोरखनाथ जी की स्वीकारोक्ति ना हो। त्रिपुरा में 35 प्रतिशत आबादी गोरखनाथ की अनुयायी है। असम की 15 प्रतिशत आबादी गोरखनाथ की अनुयायी है। पूरे देश में नाथ परंपरा के मंदिर मठ और संत-अनुयायी मौजूद हैं। 

नेपाल में तीन कालखंड में उनकी उपस्थिति रही है। काठमांडू में मृगस्थली में एक समय राजा बौद्ध हो गए थे। तब गोरखनाथ खुद नेपाल गए। मान्यता है राजा ने उनकी भी उपेक्षा की। तब गुरु गोरखनाथ ने वहां मेघों को बांध दिया था। नेपाल में तब 12 वर्ष बारिश नहीं हुई थी। तब राजा ने माफी मांगी। आज तक इसको लेकर वहां हर वर्ष बड़ा आयोजन होता है।

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