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गोण्डा: गायों और गो वंशों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी छुट्टा पशु बने गले की फांस!!

Report By: Mahesh Gupta गोण्डा।  छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए सरकारी दावे और उन दावों की हवा निकालने वाला प्रशानिक तन्त्र मवेशियों की बढ़ती संख्या से प्रतिदिन सड़क दुर्घटना की चपेट में आने मृत पशुओं के शव निस्तारण की समस्या बेहद गम्भीर बनती जा रही है मगर इस विषय पर न कोई पहल […]

Report By: Mahesh Gupta

गोण्डा  छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए सरकारी दावे और उन दावों की हवा निकालने वाला प्रशानिक तन्त्र मवेशियों की बढ़ती संख्या से प्रतिदिन सड़क दुर्घटना की चपेट में आने मृत पशुओं के शव निस्तारण की समस्या बेहद गम्भीर बनती जा रही है मगर इस विषय पर न कोई पहल होती दिखाई पड़ रही और न कोई ब्यवस्था सुनिश्चित होने का नाम ले रही है।

हालात ऐसे हैं की गोंडा उतरौला मार्ग के मध्य स्थिति कस्बा धानेपुर से पूर्व निकट पावर हाउस तिराहे पर प्रतिदिन सड़क एक दो पशुओं की मौत व राहगीरों के चोटहिल होने की घटना आम हो गयी है राहगीर तो उपचार हेतु हॉस्पिटल पहुंच जाता है किन्तु मृत पशु का शव उठाने को कोई तैयार नही होता जिससे स्थानीय निवासियों को दुर्गन्ध का दंश और छत-विछत पड़े शव को हिंसक पशु पक्षियों द्वारा तितर बितर किये जाने से पर्यावरण दूषित होने के साथ बीमारी फैलाने की सम्भावना बनी रहती है।

विदित रहे की सड़क मार्ग से महज दो किलो मीटर की दूरी पर प्रदेश की प्रथम मॉडल गौ आश्रय केंद्र संचालित है उसके बावजूद भी क्षेत्रीय किसान छुट्टा पशुओं से अपनी फसलें बचाने के लिए उन्हें खदेड़ कर सड़क पर कर जाते हैं।
इन पशुओं का जमावड़ा उक्त परिस्थितियों की वजह बनती रही है।