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केवल जूनून ही नहीं, काम करके भी दिखाना पड़ता है, तब कोई हीमादास बन पाता है

The Republic India Desk।                                कहते है ना कि जहां चाह है वहीं राह है, जिन्दगी में अगर जुनून है और कुछ करने की चाह अगर दिल से है तो फिर दुनिया में कोई चीज असंभव नहीं दोस्त सबसे पहले तो आज […]

The Republic India Desk।                                कहते है ना कि जहां चाह है वहीं राह है,

जिन्दगी में अगर जुनून है और कुछ करने की चाह अगर दिल से है तो फिर दुनिया में कोई चीज असंभव नहीं दोस्त सबसे पहले तो आज मैं उन लोगो से कुछ कहना चाहती हूँ जो अपने माँ बाप को ये बोलते है कि आपने मेरे लिए किया क्या है। हमारे लिए हमारे माँ बाप के आशीर्वाद ही काफी रहते है । लेकिन हम इस बात से जानबूझ कर अनजान रहते है।हमारे माता पिता अपने आपको कष्ट में रख कर हमारे लिए वो सब करते है जो उनके बस में भी नहीं होता परन्तु हम अपने आप मे इतने खुस रहते है खुद में इतना खोए है कि उनके सुख दुख का भी ध्यान नही होता

अगर हममें कुछ करने की आगे बढ़ने की कुछ अलग करने की चाह है तो हमारे ख्याल से कोई माँ बाप नही है जो अपने बच्चों को रोके उनसे जितना भी बन पाता है वो करते है जरूरत पड़ने पर वो अपने ही चीजो को गिरवी भी रख देते है फिर भी हम उन्हें समझ नही पाते है।
बात हम आज हिमा दास की करेंगे जिसको आज पूरी दुनिया सलाम कर रही है एक बेहद साधारण से परिवार से उठ कर आज एक असाधारण जगह पर पहुंचा दिया देश को,परिवार,खुद को. एक बहुत ही साधारण परिवार में रह कर,पल कर आज वो दुनिया को दिखा दिया कि असंभव कुछ भी नहीं! आज के समय में जब हर किसी को सारे संसाधन की व्यवस्था चाहिए और तमाम ऐसो आराम से भरे जीवन का आनंद ले रहे लोग भी कुछ नहीं कर पा रहे तो ऐसे में उसके मा बाप के पास कुछ ना रहते हुए भी वो भारत की उड़न परी बन गई और गोल्डन गर्ल के नाम से जानी जा रही है उनके माँ बाप से जो बन पड़ा उन्होंने उनके लिए किया ।

निःस्वार्थ भाव से सबसे जादे तो उनका सोच और एक बेटी की एथलेटिक्स प्रतियोगिता की दिशा में भेजने की इजाजत और सोच ही हिमा दास के लिए बहुत बड़ी बात थी नहीं तो जरा सोचो ना साहेब की एक खेतों में काम करने वाली लड़की जो गांव में पली बढ़ी जिसके पास आज के समय में कोई विशेष सुविधाएं नहीं वो भला क्या कर पाती लेकिन उनके लिए वही सब कुछ था आज जब समाज के अधिकांश महिलाएं, बेटियां घर से बाहर की दुनियां ही नहीं देखना चाहती,या उन्हें घर के चहारदीवारी में चूल्हा,चौंका,बर्तन के अलावा कोई दुनिया ही नहीं नजर आ रही ऐसे समय में हिमा ने उन तमाम लोगों के लिए उम्मीदों के पर दे दिए कि तुम में भी कुछ करने की कोशिश होनी चाहिए. दोस्त दुनियां में कोई ऐसा नहीं जिसके पास दुख ना हो,तकलीफें,और दिक्कतें ना हो लेकिन इन्हीं को जो झेलकर खुद को कामयाब बनता है वहीं तो सिकंदर कहलाता है.

हिमा दास छः भाई बहन है और वही गरीब माँ बाप के उसी छः भाई बहनों में से अकेले ही वो विश्व पटल पर देश का,अपना और अपने माँ बाप का नाम रोशन किया वही फैसिलिटी बाकी के पांच को भी तो दिए होंगे उन्होंने फिर हिमा ही क्यों आगे बढ़ी क्यो की उसमे कुछ कर दिखाने की चाह थी।

ये सच है कि दुनिया में हर कामयाबी की पीछे एक गुरु का हाथ होता है ठीक वैसे ही हिमा के कामयाबी के पीछे उनके कोच गुरु नीपोन दास जी का सबसे बड़ा योगदान है जिसने एक बहुत साधारण सी बच्ची को दुनिया की उड़न परी बना दिया।

मेरे कहने का ये मतलब है दोस्त की ये जरूरी नही है कि हमारे माँ बाप के पास बहुत पैसे हो तभी हम कुछ कर सकते है हम उनके आशीर्वाद से और उनके अच्छे देखभाल से भी बहुत कुछ कर सकते है बस हममे कुछ कर दिखाने की चाह होनी चाहिए बाकी माँ बाप का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहता है।

रिपोर्ट- मोनी मिश्रा (सोशल ब्लागर)