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वो रोती रही…बिलखती रही… लेकिन मर गई थी इंसानियत

बाराबंकी: चमरौली व नवाबगंज पुल के बीच झाड़ियों व काटों के बीच लावारिश बच्ची बरामद होने से ग्रामीणो मे आक्रोश है। गांव की ही एक महिला जिसका नाम साजिदा (पत्नी मोहम्मद नसीर ) गाय चरा रही थी तभी बच्ची की रोने की आवाज सुनाई दी तो नजदीक जाकर देखा तो बबूल के कांटो से ढकी नवजात बच्ची […]

बाराबंकी: चमरौली व नवाबगंज पुल के बीच झाड़ियों व काटों के बीच लावारिश बच्ची बरामद होने से ग्रामीणो मे आक्रोश है। गांव की ही एक महिला जिसका नाम साजिदा (पत्नी मोहम्मद नसीर ) गाय चरा रही थी तभी बच्ची की रोने की आवाज सुनाई दी तो नजदीक जाकर देखा तो बबूल के कांटो से ढकी नवजात बच्ची थी वह घायल भी थी भूखी भी थी किंतु ईश्वरीय शक्ति के बल पर बच्ची को जीवन दान मिला।उसे किसी ओर माँ ने अपना आँचल प्रदान किया।

बेटी बचाओ और बेटी पढाओ का नारा बुलंद करने वाली सरकारों को व राज्य के संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को विशेष रूप ऐसे मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं पर विशेष रूप से अंकुश लगाया जा सकें।

मानवता व इंसानियत हुई तार – तार। इंसान से अच्छे तो जानवर जंगल मे रहते है। आज का इंसान मानवता व धर्म की सीमाओं की मर्यादा का उल्लंघन कर समाज की लोकशांती भंग कर रहा है और अनैतिक व अधर्म कार्य करके समाज को दूषित कर समाजिक सीमाओं की मर्यादा का उल्लंघन कर पवित्रता को भंग कर रहा है। और कानून व संविधान के रखवाले अपनी आँखों पर पट्टी बांध कर मौन साधे बैठे है।

बच्ची को रोता देख साजिदा ने सोर मचाया और तब आस पास के लोग आकर बच्ची को बबूल के कांटो के बीच पाकर सन्न रह गए और बच्ची को कांटो से उठाकर अपने साथ गांव ले आए और देखरेख की व शरीर से कांटे भी निकालें। ग्रामीणों के द्वारा इस घटना की सूचना तत्काल जिम्मेदार लोगों को दी गई और बच्ची की तबीयत खराब होने के कारण ग्रामीणों के द्वारा 108 नम्बरा पर एम्बुलेंस सेवा को फोन कर सूचित किया और तत्काल प्रभाव से बच्ची को सरकारी अस्पताल टिकैत नगर के लिए रवाना किया गया और डाक्टरों के द्वारा बच्ची की ज़रूरी जांच कर उपचार प्रदान किया गया किंतु बच्ची का वजन लगभग 1 किलो 20 ग्राम होने के कारण बच्ची की स्वास्थ्य की गंभीरता को देखते हुए डाक्टरों ने जिला अस्पताल बाराबंकी को रेफर कर दिया गया। बच्ची के साथ साजिदा और सत्यम सिंह व महिला सिपाही पूनम जिला अस्पताल साथ मे गऐ।

नये भारत मे आजादी राजनैतिक रूप से बहुत ही पेचीदा मामला है। गंदगी को साफ करने के लिए साफ पानी की जरुरत होती है न कि गंदे पानी की।