शुक्लागंज: गणेश महोत्सव कार्यक्रम में राम लक्ष्मण संवाद का आयोजन

शुक्लागंज: गणेश महोत्सव कार्यक्रम में राम लक्ष्मण संवाद का आयोजन

Report By: Ankit Kushawaha

शुक्लागंज, उन्नाव नगर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित हो रहे गणेश महोत्सव में गजानन महाराज की विधि विधान से पूजा की गई। वहीं गणेश प्रतिमा की महाआरती उतारी। जिसके बाद राम लक्ष्मण संवाद का आयोजन हुआ। जिसमें शिवधनुष टूटने के साथ सीता स्वयंवर की खबर मिलने पर परशुराम जनकपुरी में स्वयंवर स्थान पर आ जाते है। हाथ में फरसा लिए क्रोधित हो धनुष तोड़ने वाले को सामने आने, सहस्त्रबाहु की तरह दडिंत होने और न आने पर वहाँ उपस्थित सभी राजाओं को मारे जाने की धमकी देते हैं। उनके क्रोध को शांत करने के लिए राम आगे बढ़कर कहते हैं कि धनुष-भंग करने का बड़ा काम उनका कोई दास ही कर सकता है।

परशुराम इस पर और क्रोधित होते हैं कि दास होकर भी उसने शिवधनुष को क्यों तोड़ा। यह तो दास के उपयुक्त काम नहीं है। लक्ष्मण परशुराम को यह कहकर और क्रोधित कर देते हैं कि बचपन में शिवधनुष जैसे छोटे कितने ही धनुषों को उन्होंने तोड़ा, तब वे मना करने क्यो नहीं आए आरै अब जब पुराना आरै कमजाोर धनुष् श्रीराम के हाथों में आते ही टूट गया तो क्यों क्रोधित हो रहे हैं। परशुराम जब अपनी ताकत से ध्रती को कई बार क्षत्रियों से हीन करके बा्र ह्मणों को दान देने और गर्भस्थ शिशुओं तक के नाश करने की बात बताते हैं तो लक्ष्मण उन पर शूरवीरों से पाला न पड़े जाने का व्यंग्य करते हैं।

तब सारी सभा में हाहाकार मच जाता है आरै तब श्रीराम अपनी मधुर वाणी से परशुराम की क्रोध रूपी अग्नि को शांत करने का प्रयास करते हैं। जिसके बाद लक्ष्मण ने परशुराम से संवाद करते हुए कहा कि छुई मुई का पेड़ नहीं जो छूते मुरझा जायें वह माई का लाल नहीं जो फरशा देख डर जायें।

Ryan Reynold
Piyush Gupta is a writer based in India. When he's not writing about apps, marketing, or tech, you can probably catch him eating ice cream.

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