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शुक्लागंज, उन्नाव : आंखो में आंसू, सीने पर मातम, जुबां पर या हुसैन -या हुसैन

Report By: Ankit Kushwaha शुक्लागंज, उन्नाव।  आंखो में आंसू, सीने पर मातम, जुबां पर या हुसैन -या हुसैन की सदाओ के बीच दसवीं मोहरर्म में हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत पर ताजिये के जुलूस गंगाघाट क्षेत्र के कोने कोने में निकाले गयें इस अवसर पर अजादर काले कपडें धारण किये थे, जगह- […]

Report By: Ankit Kushwaha

शुक्लागंज, उन्नाव।  आंखो में आंसू, सीने पर मातम, जुबां पर या हुसैन -या हुसैन की सदाओ के बीच दसवीं मोहरर्म में हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत पर ताजिये के जुलूस गंगाघाट क्षेत्र के कोने कोने में निकाले गयें इस अवसर पर अजादर काले कपडें धारण किये थे, जगह- जगह शकीले आयोजन किया गया, मोहर्रम पैगम्बरे इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ सच्चाई, हक इन्साफ बचाने के लिए जुल्म के खिलाफ आवाज उठायी थी और कर्बला में कुर्बानी दी थी, जिसकी याद हर वर्ष मनायी जाती है।

दरअसल, कर्बला के इतिहास को पढ़ने के बाद मालूम होता है कि यह महीना कुर्बानी, गमखारी और भाईचारगी का महीना है। क्योंकि हजरत इमाम हुसैन रजि. ने अपनी कुर्बानी देकर पुरी इंसानियत को यह पैगाम दिया है कि अपने हक को माफ करने वाले बनो और दुसरों का हक देने वाले बनो। आज जितनी बुराई जन्म ले रही है, उसकी वजह यह है कि लोगों ने हजरत इमाम हुसैन रजि. के इस पैगाम को भुला दिया और इस दिन के नाम पर उनसे मोहब्बत में नये नये रस्में शुरू की गई।

इसका इसलामी इतिहास, कुरआन और हदीस में कहीं भी सबूत नहीं मिलता है। मुहर्रम में इमाम हुसैन के नाम पर ढोल-तासे बजाना, जुलूस निकालना, इमामबाड़ा को सजाना, ताजिया बनाना, यह सारे काम इस्लाम के मुताबिक गुनाह है। इसका ताअल्लुक हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी और पैगाम से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रखता है। यानी ताजिए का इस्लाम धर्म से कोई सरोकार या संबंध नहीं है। भारतीय उपमहाद्वीय के बाहर दुनिया में कहीं और मुसलमानों में ताजिए का चलन नहीं है। वही गंगाघाट क्षेत्र के कोने-कोने से दसंवी मोहरर्म को ताजियों का जुलुस मनोहर नगर , अहमद नगर , रहमत नगर, रशीद कालोनी, मदनी नगर, अली नगर, चम्मापुरवा, गोताखोर, आदि स्थानो में शिया-सुन्नी व हिन्दू अकीदतंमदो ने ताजियों के जुलुसों में शिरकत कर जालिम और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई, तथा चम्मापुरवा, गोताखोर स्थित कर्बला में समाप्त हुआ।