चुप हो जाइए, अधिकारी सब सो रहे हैं, गांव वाले बिन बिजली 4 साल से रो रहें

चुप हो जाइए, अधिकारी सब सो रहे हैं, गांव वाले बिन बिजली 4 साल से रो रहें
चुप हो जाइए, अधिकारी सब सो रहे हैं, गांव वाले बिन बिजली 4 साल से रो रहें

संवाददाता- देवेंद्र यादव

ललितपुर। ग्राम दैलवारा के मजरा गजऊ निवासी वर्ष 2016 से तहसील दिवस, जिलाधिकारी, विधायक और सांसद के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सौभाग्य योजना के अंतर्गत बिजली नहीं मिली है। क्षेत्रीय विधायक ने अधिशासी अभियंता को मई 2019 में पत्र लिखकर विद्युतीकरण का कार्य कराने को कहा था, लेकिन बिजली विभाग ने इस पत्र को कचरे के ढेर में डाल दिया है। ग्रामीण अब तक बिजली पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।शासन ‘सौभाग्य’ योजना के अंतर्गत गांव- गांव और घर- घर बिजली पहुंचा रहा है। लेकिन, इसके बाद भी ग्राम दैलवारा में शासन की योजना को ठेंगा दिखाया जा रहा है। यहां के ग्रामीणों ने 20 नवंबर 2016 में तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र दिया था कि मजरा में बिजली पहुंचाई जाए। नियम है कि तहसील दिवस में आने वाली शिकायतों का एक सप्ताह में समाधान किया जाए। लेकिन, मजरा में अब तक बिजली नहीं पहुंची।


ग्रामीणों ने पांच बार तहसील दिवस में समस्या बताई, पर हुआ कुछ नहीं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को सात नवंबर 2017 में बिजली लगवाने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया। कागजी लिखापढ़ी हुई, पर ग्रामीणों को बिजली नहीं मिली। इसके बाद मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले शिकायत पोर्टल आईजीआरएस पर दर्ज कराई गई।


आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में जिला लगातार पहले स्थान पर आकर अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ। खास बात यह है कि बिजली विभाग के मुख्य अभियंता ने अधीक्षण अभियंता को 15 दिन में नियमानुसार कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश 31 जुलाई 2018 को दिए थे, लेकिन इस रिपोर्ट का क्या हुआ। कुछ नहीं पता।


प्रशासनिक मशीनरी से थक हारकर ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के मुंह की ओर भरोसा किया कि शायद अब समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने अधिशासी अभियंता दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड को 17 मई 2019 को पत्र लिखा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में सौभाग्य योजना के अंतर्गत विद्युतीकरण का कार्य किया जाना है। ग्राम दैलवारा में मजरा गजऊ से लेकर रेलवे स्टेशन तक नई बिजली की लाइन खंभे, ट्रांसफार्मर लगाकर विद्युतीकरण होना आवश्यक है। इसलिए विद्युतीकरण कार्य करना सुनिश्चित करें। लेकिन, कुछ नहीं हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने 24 अक्तूबर 2019 को सांसद को भी ज्ञापन दिया, परंतु उनका कोई प्रयास काम नहीं आ सका। ग्रामीण अब भी लालटेन के युग में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीण ब्रजभान, अनंत, रामभरत, भगवानदास, प्रकाश, हरीराम आदि ने विद्युतीकरण कराने की मांग की है।


साहबों के पास चक्कर लगाते- लगाते परेशान हो गए हैं, लेकिन बिजली अब तक नहीं मिली है। अब तो विधायक और सांसद पर भी भरोसा नहीं रहा।
– गोवर्धन


बिजली विभाग आनाकानी कर रहा है। मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सरकारें बड़े- बड़े दावे करती हैं। जबकि, हकीकत यह है कि अधिकारी मनमानी करते हैं।
– अशोक कुमार


बिजली विभाग के अधिकारियों को किसी का डर नहीं है। वह मनमाने ढंग से काम करते हैं। आखिर आस विधायक से थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई। अब आंदोलन करना पड़ेगा।
– अनंत कुमार

नेता और न अधिकारी बिजली विभाग का कुछ बिगाड़ पा रहे हैं। जबकि, बिजली विभाग में प्रार्थनापत्र देते- देते चार साल हो गए। अब कलेक्ट्रेट में धरना देना पड़ेेगा, तभी कुछ होगा।
– ब्रजभान

चार साल हो गए, लेकिन सौभाग्य योजना के तहत उनके मजरा में बिजली नहीं पहुंच सकी, जबकि सभी अधिकारियों और विधायक से कह चुके हैं। कागजी लिखा पढ़ी हो रही, लेकिन काम नहीं हो रहा।
– कौशल

गांव- गांव में बिजली पहुंच गई, लेकिन मजरे में बिजली विभाग के अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। अब मिट्टी का तेल मिलना मुश्किल होता जा रहा है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
– हरीकिशन

ग्रामीणों ने सौभाग्य योजना के अंतर्गत बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया होगा, इससे वहां पर बिजली की सुविधा नहीं मिल सकी। अन्य किसी योजना द्वारा बिजली की सुविधा दी जाएगी।
– आकाश सचान, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण

Ryan Reynold
Piyush Gupta is a writer based in India. When he's not writing about apps, marketing, or tech, you can probably catch him eating ice cream.

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