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बाराबंकी के कस्बा जैदपुर में आशुरा के दिन यानी 10वी मोहर्रम मनाई गई

Report By : Abu Talha  बाराबंकी | यह मोहर्रम का महीना शुरू होते ही जगह-जगह से जुलूस निकाले जाते हैं तथा मजलिसे होतीं है बताया जाता है कि ये मोहर्रम का महीना हजरत इमाम हुसैन और उनके लस्कर मे मोजूद 72 मात्र लोगों ने इस्लाम को जिन्दा रखने के लिए शहीद हो गये उनकी यादगार […]

Report By : Abu Talha 

बाराबंकी | यह मोहर्रम का महीना शुरू होते ही जगह-जगह से जुलूस निकाले जाते हैं तथा मजलिसे होतीं है बताया जाता है कि ये मोहर्रम का महीना हजरत इमाम हुसैन और उनके लस्कर मे मोजूद 72 मात्र लोगों ने इस्लाम को जिन्दा रखने के लिए शहीद हो गये उनकी यादगार में मनाया जाता है। दस मोहर्रम को कर्बला की तप्ती हुई जमीन पर हजरत इमाम हुसैन की नमाज की हालत मे शहादत हुई थी
इस्लाम धर्म शान्ति का प्रतीक हैं हजरत इमाम हुसैन जंग नही करना चाहते थे लेकिन जालिम लोग जंग पर उतावले थे और बादशाहत को हासिल करना चाहते थे।आखिर कार इमाम हुसैन ने जंग का ऐलान किया जालिमो की एक लाख फौज को इमाम हुसैन के मात्र 72 जवानों ने मुकाबला किया और धीरे धीरे सभी लोगों को अपनी कुर्बानी देनी पड़ी।


मोहर्रम की 10 तारीख को जैदपुर मे छोटे बडे लगभग सैकड़ों ताजिया उठाये जाते है वही बडी बाजार स्थित टेडी चौक पर ताजिया चढाने का प्रयास करते लोगो मे अफरा तफरी होने लगी जिसके चलते कोई बच्चे व बडे चोटिल हो गये।


इमाम हुसैन की याद मे 9 मोहर्रम को ताजिया रखते है और 10 मोहर्रम को ताजिया उठा कर कर्बला को दफनाया जाता है बताया जाता है की मोहर्रम की 10 तारीख को जब कर्बला की तपती हुई जमीन पर यजिदियों व हुसैन के बीच जंग हो रही थी उस समय उनके नाना जान की नमाज का वक्त हो गया था और उन्होंने नमाज पढ़ना शुरू कर दिया नमाज अदा करते हुए जिस वक्त सजदे में गए उसी वक्त जालिमों ने उनके सर को तन से जुदा कर दिया भूखे प्यासे इमामे हुसैन को आज के दिन ही यजिदियों ने कर्बला की तपती हुई जमीन पर शहीद कर दिया था तारीख गवाह है की आज वो तारीख और वो दिन है जिस दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी इसी लिए लोग उनकी यादगार में जगह-जगह सबील यानी शरबत व चाय व अन्य खाने-पीने की चीजों को तकसीम करते है और लोगों को खिलाया पिलाया जाता है इस मोके पर जैदपुर के अबू उमैर अंसारी सभासद ताहिर अंसारी मदनी खांन सलाहुद्दीन सफीक सुफयान हारून राईन इमदाद मामा मिनहाज वैश आदि लोग मोजूद रहे।