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गोरखपुर: “या हुसैन” की सदाएं बुलंद करता हुआ निकला चौथी मोहर्रम का मातमी जुलूस

Report By: Dhanesh Nishad गोरखपुर। मोहर्रम की चौथी को बसंतपुर स्थित मोहम्मद मेहंदी एडवोकेट के आवास से मातमी जुलूस अपनी पुरानी रवायत और परम्परा के साथ निकाला गया. दोपहर 2:00 बजे निकल कर जुलूस हालती गंज घंटाघर रेती चौक होता हुआ इमामबाड़ा आगा साहिबान निकट गीता प्रेस पर समाप्त हुआ . जुलूस के दौरान मोहम्मद […]

Report By: Dhanesh Nishad

गोरखपुर मोहर्रम की चौथी को बसंतपुर स्थित मोहम्मद मेहंदी एडवोकेट के आवास से मातमी जुलूस अपनी पुरानी रवायत और परम्परा के साथ निकाला गया. दोपहर 2:00 बजे निकल कर जुलूस हालती गंज घंटाघर रेती चौक होता हुआ इमामबाड़ा आगा साहिबान निकट गीता प्रेस पर समाप्त हुआ .

जुलूस के दौरान मोहम्मद मेहंदी एडवोकेट ने कहां की हजरत इमाम हुसैन ने 1400 साल पहले कर्बला की धरती पर यजीद जैसे जालिम बादशाह के खिलाफ मानवता को बचाने के लिए अपनी व अपने घर वालों सहित कुल 72 लोगों की कुर्बानी दे दी . हजरत इमाम हुसैन ने यह कुर्बानी किसी विशेष धर्म जाति अथवा संप्रदाय के लिए नहीं दिया बल्कि दुनिया के इतिहास में यह आतंकवाद के खिलाफ नेक लोगों की पहली जंग थी. उन्होंने कहा कि पैगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथियों की अज़ीम कुर्बानी की याद में यह जुलूस निकाला जाता है.

जुलूस के दौरान मातमदार हाथों के अलावा जंजीर व कामा का मातम करते हुए या हुसैन या हुसैन की सदाएं बुलंद कर रहे थे.

जुलूस की अगुवाई अली जहीर मेहंदी एजाज हुसैन एडवोकेट साबिर हुसैन व रफत हुसैन आदि ने किया इसके अलावा तकी मुंतशिर हुसैन मिर्जा अली आरिफ हुसैन मौलाना हुसैन ने नौहाख्वानी किया. जुलूस के दौरान ताबिश सैफी अली अब्बास आदि ने कम व जंजीरों का मातम किया जुलूस के रास्ते में हजारों लोगों की भीड़ सड़क के दोनों ओर जमी रही .

मगरिब की नमाज से पहले इमामबाड़ा आगा साहिबान में पहुंचकर जुलूस का समापन हुआ.